Kashish - ae - Aehshass wah pyar ka - 1 in Hindi Love Stories by sumit kushwah books and stories PDF | कशिश - ए अहसास वह प्यार का - 1

Featured Books
Categories
Share

कशिश - ए अहसास वह प्यार का - 1

कहते हैं, प्यार कभी दूरियों का मोहताज नहीं होता—वह बिना पास आए भी किसी को बेहद क़रीब कर देता है। प्यार कोई ऐसा शब्द नहीं, जिसे ज़ुबान से कहा जाए; वह तो एक एहसास है, जिसे ख़ामोशी में महसूस किया जाता है, धीरे-धीरे अपनी रूह में बसाया जाता है, और फिर इंसान की हर धड़कन में अपना घर बना लेता है।


___
आज की कहानी खास है—शायद अब तक की सबसे बेहतरीन। अगर यह कहानी आपके दिल को छू जाए, तो हमें फॉलो करना न भूलें, अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं, और अपना प्रोत्साहन दें, ताकि हम आगे भी आपके लिए ऐसी ही भावनाओं से भरी कहानियाँ लिखते रहें।
____

नोट: यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है और एक स्कूल लव स्टोरी पर आधारित है। इस कहानी के सभी पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं। यदि कहानी में कुछ बातें वास्तविक जीवन से मिलती-जुलती प्रतीत हों, तो उसे केवल संयोग समझें।
___

कहानी शुरू होती है।


हल्की-हल्की धूप आसमान में खिल रही थी और उसी धूप के साथ रिमझिम बारिश की बूँदें भी गिर रही थीं। हाथों में एक सुंदर सा छाता, कंधे पर काले रंग का बैग, बालों में बनी दो चोटियाँ और आँखों में गहरा काजल लगाए एक प्यारी सी लड़की स्कूल की ओर बढ़ रही थी। उसका नाम काजल था।
बारिश में चलते हुए उसके हर कदम के साथ ज़मीन पर पानी की हल्की-सी छप-छप की आवाज़ गूँज रही थी। वह बड़बड़ाते हुए आगे बढ़ रही थी।
“पता नहीं यार, स्कूल वाले छुट्टी क्यों नहीं देते। इतनी मस्त बारिश हो रही थी, ऊपर से सूरज भी निकल आया। मैं तो आराम से रजाई ओढ़कर सो रही थी, लेकिन मम्मी ने जबरदस्ती उठा कर स्कूल भेज दिया,”
काजल ने मन ही मन शिकायत की।
इतना कहकर उसने चारों तरफ नज़र दौड़ाई। सड़क लगभग खाली थी।
“आज तो कोई दिख भी नहीं रहा… लगता है कोई स्कूल नहीं आया,”
वह खुद से ही बोलती हुई स्कूल के गेट तक पहुँच गई।
स्कूल में प्रार्थना शुरू हो चुकी थी। काजल जल्दी से अपनी क्लास की लाइन में जाकर हाथ जोड़कर खड़ी हो गई और प्रार्थना में शामिल हो गई—
“या देवी सर्वभूतेषु, माँ सरस्वती रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”
प्रार्थना समाप्त होते ही वह अपना बैग संभालती है और अपनी सहेलियों के साथ क्लास की ओर बढ़ जाती है।
क्लासरूम बहुत ही साधारण और सुंदर था—एक ब्लैकबोर्ड, कई बेंचें और सामने की मेज़ पर रखा रजिस्टर और पेन। काजल जाकर पहली बेंच पर बैठ गई। चारों तरफ बच्चों की हल्की-हल्की चहल-पहल थी।
तभी उसकी दोस्त दीया आकर उसके पास बैठ गई। काजल को देखते ही दीया मुस्कुराई।
“हाय काजल, कैसी है?”
दीया ने प्यार से पूछा।
“अरे दीया, मैं अच्छी हूँ। तू बता,”
काजल भी मुस्कुराते हुए बोली।
दीया हँसते हुए बोली,
“मैं भी ठीक हूँ… वैसे तूने होमवर्क किया? मैंने तो बिल्कुल नहीं किया।”

दीया की बात सुनकर काजल धीरे से बोली,
“हाँ, मैंने कर लिया… पर एक बात बता, तूने क्यों नहीं किया?”
काजल का सवाल सुनते ही दीया हँसने लगी और बोली,
“पता है, कल रात सोचा था कि आज स्कूल नहीं आऊँगी। लेकिन सुबह-सुबह मम्मी ने डाँटकर भेज दिया। बोलीं—
‘घर पर रहकर क्या करेगी? चुपचाप जा स्कूल, वरना फिर पड़ेगी एक!’”
इतना कहते ही दोनों ज़ोर से हँस पड़ीं।
काजल भी मुस्कुराते हुए बोली,
“मेरा तो बिल्कुल मन नहीं था। सुबह-सुबह इतनी मस्त बारिश हो रही थी। मैंने मम्मी से कहा भी कि आज स्कूल नहीं जाऊँगी, लेकिन उन्होंने जबरदस्ती भेज दिया।”
तभी क्लास के दरवाज़े पर लड़कों का एक ग्रुप अंदर आता है। सबके कपड़े हल्के-हल्के गीले थे, जैसे वे अभी-अभी बारिश में भीगकर आए हों। उन्हीं में से एक था—वैभव। गोरा रंग, चेहरे पर अलग ही चमक, सलीके से सेट किए हुए बाल और स्मार्ट सा अंदाज़। जैसे ही वह क्लास में दाख़िल हुआ, लगभग सारी लड़कियों की नज़रें उसी पर टिक गईं—सिवाय काजल के।
वैभव की नज़र अचानक काजल पर पड़ी। वह उसे एकटक देखने लगा और फिर हल्की-सी मुस्कान के साथ अपनी सीट पर जाकर बैठ गया। उसी पल फर्स्ट पीरियड की बेल बज उठी।
“ट्रिन… ट्रिन…”
पूरे स्कूल में बेल की आवाज़ गूँजने लगी।
कुछ ही देर में लगभग पच्चीस साल की एक सुंदर-सी टीचर, हाथ में बैग लिए, खुले बाल और सादा-सा सूट-सलवार पहने, क्लास के अंदर आईं। उनके आते ही सारे बच्चे एक साथ खड़े हो गए।
“गुड मॉर्निंग, टीचर!”
बच्चों की आवाज़ सुनकर मिस प्रीति मुस्कुराईं और बोलीं,
“गुड मॉर्निंग। चलो, सब अपनी-अपनी सीट पर बैठ जाओ और किताबें निकाल लो।”
इतना कहते ही बच्चे अपनी-अपनी बुक निकालने लगे। काजल ने भी बैग में हाथ डाला, लेकिन उसकी किताब नहीं मिली। वह घबरा गई।
“अरे! मेरी बुक कहाँ गई? कल तक तो मेरे पास ही थी,”
वह परेशान होकर बोली।
काजल को घबराया हुआ देखकर दीया ने उससे पूछा,
“क्या हुआ? इतनी परेशान क्यों है? कोई दिक्कत है क्या?”

दीया की बात सुनकर काजल ने एक नज़र प्रीति मैडम की ओर डाली और धीरे से बोली,
“अरे… मैं तो अपनी बुक लाना ही भूल गई।”
काजल की बात सुनकर दीया हैरान होकर फुसफुसाई,
“अरे, तू कैसे भूल गई? तू तो रोज़ लाती है। आज ही क्यों नहीं लाई?”
काजल थोड़ा परेशान होकर बोली,
“अरे, गलती इंसानों से ही होती है। मैं रोज़ लाती हूँ, लेकिन कल होमवर्क करते-करते रखी ही नहीं। अब तो पक्का प्रीति मैडम सज़ा देंगी।”
काजल फिर से डरते हुए प्रीति मैडम की तरफ देखने लगी। उसकी बात सुनकर दीया बोली,
“रुक जा, मैं कुछ करती हूँ।”
इतना कहकर दीया पास की कुछ लड़कियों से किताब माँगने लगी।
“सुनो कीर्ति, तेरे पास एक्स्ट्रा बुक है क्या? प्लीज़ दे दे। आज काजल बुक लाना भूल गई है।”
दीया की बात सुनकर कीर्ति बोली,
“अरे बहन, मेरे पास नहीं है। मेरे पास खुद एक ही है। वो भी अगर तुझे दे दूँ तो मुझे सज़ा मिल जाएगी। तू जानती है न, प्रीति मैडम कितनी सख़्त हैं।”
कीर्ति की बात सुनकर काजल मायूस होकर बोली,
“अब कुछ नहीं हो सकता। आज तो मार मुझे खानी ही पड़ेगी।”
इतना कहकर वह धीरे से अपनी सीट से खड़ी हो गई।
तभी दीया ने जल्दी से कहा,
“अरे काजल, सुन! बुक मिल गई।”
दीया की बात सुनते ही काजल एकदम उसकी तरफ मुड़ी और घबराकर बोली,
“क्या? कहाँ से मिली? और किसने दी?”
“अरे बाबा, बता रही हूँ। पहले चुपचाप बैठ जा, नहीं तो प्रीति मैडम चिल्ला देंगी,”
दीया ने फुसफुसाते हुए कहा।
दीया की बात सुनकर काजल तुरंत अपनी सीट पर बैठ गई। दीया ने उसे किताब पकड़ाई। काजल ने किताब खोली और उस पर लिखा नाम पढ़ा।
“अरे दीया… इसमें तो वैभव लिखा है। ये वैभव कौन है? और इसने बुक क्यों दी?”
काजल हैरानी से बोली।
दीया मुस्कुराते हुए बोली,
“पीछे देख। वो जो स्मार्ट सा लड़का खड़ा है न, वही वैभव है। और तुझे क्या? तुझे तो सज़ा नहीं पड़ेगी।”
दीया की बात सुनकर काजल ने पीछे मुड़कर एक नज़र देखा और तुरंत बोली,
“अरे यार… पर उसे तो सज़ा मिल जाएगी। एक काम कर, तू ये बुक वापस कर दे। हम दोनों साथ में मार खा लेंगे।”

उन दोनों को आपस में बातें करते देखकर प्रीति मैडम की नज़र उन पर पड़ गई। उन्होंने सख़्त आवाज़ में कहा,
“साइलेंट! ऐसी क्या ज़रूरी बातें हो रही हैं, जो चुप होने का नाम ही नहीं ले रही हो?”
फिर वह पूरी क्लास की ओर देखते हुए बोलीं,
“अच्छा बच्चों, बताओ—कौन-कौन आज किताब नहीं लाया है? जो नहीं लाया, वो खड़ा हो जाए।”
मैडम के इतना कहते ही वैभव चुपचाप अपनी सीट से खड़ा हो गया। कुछ ही पलों में प्रीति मैडम उसके पास आ गईं और तेज़ आवाज़ में बोलीं,
“तुम किताब क्यों नहीं लाए?”
प्रीति मैडम की डाँट सुनकर वैभव ने सिर झुका लिया और धीरे से बोला,
“सॉरी मिस… आज गलती से भूल गया। आगे से ध्यान रखूँगा।”
वैभव की बात सुनकर प्रीति मैडम और गुस्से में आ गईं।
“बाहर निकलो!”
इतना कहकर उन्होंने उसे क्लास से बाहर खड़ा कर दिया और सज़ा दी।
क्लास में बैठी काजल यह सब देख रही थी। उसका दिल अजीब-सा हो गया। वह धीरे से दीया से बोली,
“देख दीया… बेचारा हमारी वजह से सज़ा झेल रहा है, और हम कुछ भी नहीं कर पा रहे।”
दीया ने धीमी आवाज़ में कहा,
“अब तेरा क्या इरादा है? मैडम को सब सच बता दें और खुद भी सज़ा खाएँ, या चुपचाप बैठे रहें?”
काजल कुछ नहीं बोली। बस मायूसी से सामने देखने लगी।
उधर प्रीति मैडम ने वैभव को क्लास के एक कोने में खड़ा कर दिया और ज़ोर से बोलीं,
“आज सब ध्यान से सुन लो। अगर आगे से मेरे सब्जेक्ट की किताब या कॉपी कोई भूलकर लाया, तो उसका हाल भी वैभव जैसा ही होगा।”
वैभव एक कोने में खड़ा सब सुन रहा था। उसकी नज़र अनजाने में काजल से टकरा गई। काजल ने हल्की-सी मुस्कान उसकी ओर बढ़ाई। उसे देखकर वैभव भी धीरे से मुस्कुरा दिया।
कुछ ही देर में पीरियड खत्म हो गया।
अचानक स्कूल की बेल दोबारा बज उठी। प्रीति मैडम ने अटेंडेंस ली और फिर वैभव के पास आकर धीमी आवाज़ में बोलीं,
“जाओ, अपनी सीट पर बैठ जाओ। आज तो बच गए, लेकिन कल से किताब मत भूलना।”
वैभव चुपचाप अपनी जगह आकर बैठ गया। तभी उसके दोस्त उससे फुसफुसाकर बोले,
“अरे वैभव, तू तो किताब लाया था। फिर दीया को क्यों दे दी? तुझे पता था न, प्रीति मैडम कितना गुस्सा करती हैं?”
ऋषि की बात सुनकर वैभव हल्की मुस्कान के साथ बोला,
“यार, वो एक लड़की है। अगर उसे सज़ा मिलती तो अच्छा नहीं लगता। वैसे भी औरतों को बचाना चाहिए। हमारा क्या है।”
फिर मज़ाकिया अंदाज़ में बोला,
“और सुना नहीं क्या—हम मर्द हैं, और मर्द को कभी दर्द नहीं होता।”
वैभव की बात सुनकर ऋषि हँस पड़ा।
“हाँ भाई, बड़ा नेक काम किया तूने।”
तभी दूसरी टीचर क्लास में आ गईं और पढ़ाना शुरू कर दिया। देखते-देखते चार पीरियड बीत गए और अचानक लंच की घंटी बज उठी।
“ट्रिन… ट्रिन… ट्रिन…”
घंटी बजते ही सारे बच्चे अपना-अपना सामान समेटने लगे। काजल ने भी अपना काम बैग में रखा और एक बार पीछे मुड़कर देखा।
लेकिन तब तक वैभव अपने दोस्तों के साथ बाहर जा चुका था।


क्या काजल कभी वैभव से “सॉरी” कह पाएगी?
या यह एहसास उसके दिल में ही रह जाएगा?
इसका जवाब जानने के लिए ज़रूर देखें Part 2।
अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो, तो हमें फॉलो करें, और कमेंट में बताएं कि आपको काजल और वैभव की कहानी कैसी लगी। साथ ही अपना प्रोत्साहन और सब्सक्रिप्शन देना न भूलें, ताकि हम आपके लिए ऐसी ही प्यारी कहानियाँ लाते रहें।
आपका छोटा सा लेखक
महेश